16 वेबसाइट के 61.17 करोड़ यूजर्स का डेटा हैक, इसे डार्क वेब पर बेच रहे हैकर

0
72

साल के दूसरे महीने में ही दूसरी बार डेटा लीक का एक बड़ा मामला सामने आया है। दरअसल, ब्रिटिश वेबसाइट द रजिस्टर ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि, साइबर क्रिमिनल्स 16 अलग-अलग वेबसाइट के यूजर्स का डेटा डार्क वेब पर बेच रहे हैं। इस डेटा लीक में 61.17 करोड़ यूजर्स के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन वेबसाइट में डबमैश, माय फिटनेस पाल और फोटोलॉग जैसी कई पॉपुलर वेबसाइट शामिल हैं, जिन्हें भारत में भी काफी इस्तेमाल किया जाता है। इन वेबसाइट में सबसे बड़ा डेटाबेस डबमैश का है, जिसके 16 करोड़ से ज्यादा यूजर्स का डेटा लीक हुआ है। 

रिपोर्ट में हुए कई बड़े खुलासे

  1. द रजिस्टर की रिपोर्ट के मुताबिक चोरी किए गए इन अकाउंट की डिटेल्स को ड्रीम मार्केट Cyber-souk से खरीदा जा सकता है जो टॉर नेटवर्क पर मिलता है। जिसे 20 हजार डॉलर बिटकॉइन से भी कम में बेचा जा रहा है।
  2. चोरी किए गए डेटाबेस में यूजर्स की पर्सनल डिटेल्स जैसे नाम, ईमेल आईडी, पासवर्ड, लोकेशन के अलावा सोशल मीडिया ऑथेन्टिकेशन टोकेन्स जैसी जानकारियां शामिल हैं जिनकी मदद से हैकर्स आपके अन्य अकाउंट्स को भी आसानी से हैक कर सकते हैं।
  3. ये अकाउंट्स डिटेल्स कई जीबी में हैं। हालांकि यह प्लेन टैक्स्ट में उपलब्ध नहीं है बल्कि यह वन वे एन्क्रिप्टेड है, जिसे क्रैक कर यूजर की ईमेल आईडी को आसानी से एक्सेस किया जा सकता है। कुछ समय पहले भी इसी तरह का डेटा लीक हुआ था जिसका खुलासा ऑस्ट्रेलियन सिक्योरिटी रिसर्चर ट्रॉय हंट ने किया था।
  4. इन 16 वेबसाइट का डेटा हुआ है लीक
वेबसाइटडिटेल
डबमैश16. 2 करोड़
माय फिटनेसपाल15.1 करोड़
माय हैरिटेज9.2 करोड़
शेयर दिस4.1 करोड़
हाउटे लुक2.8 करोड़
एनिमोटो2.5 करोड़
आईएम2.2 करोड़
8फिट2 करोड़
व्हाइट पेजेस1.8 करोड़
फोटोलॉग1.8 करोड़
500px1.5 करोड़
आर्मर गेम्स1.1 करोड़
बुकमैट0.8 करोड़
कॉफी मीट्स बेगल0.6 करोड़
आर्टसे0.1 करोड़
डेटा कैंप7 लाख
  1. चेक करें कहीं आपकी डिटेल तो नहीं हुई लीक

अगर आप चेक करना चाहते हैं कि आपका डेटा लीक हुआ है या नहीं तो आप haveibeenpwned.com पर जाकर भी चेक कर सकते हैं। हालांकि इस बात का अभी पता नहीं चल पाया है कि haveibeenpwned पर इस डेटा के बारे में अपडेट किया गया है या नहीं।

क्या होता है डार्क वेब?

  1. साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट के मुताबिक ‘इंटरनेट का 96% डार्क वेब है और हम जो इंटरनेट देखते हैं वो सिर्फ 4% है। डार्क वेब पर हैकर्स यूजर्स का डेटा हैक करने में लगे रहते हैं और इन्हें फिर बेचा जाता है।’
  2. डार्क वेब पर इंटरनेट के आम ब्राउजर पर नहीं खुलते और इन्हें सिर्फ TOR ब्राउजर पर ही खोला जा सकता है और इन्हें ट्रैक करना काफी मुश्किल होता है।
  3. डार्क वेब का इस्तेमाल ज्यादातर आपराधिक गतिविधियों के लिए ही किया जाता है। यहां पर हैकिंग सर्विस की तरह होती है, मतलब पैसे देकर किसी की भी हैकिंग करवाई जा सकती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here