वरिष्ठ कवि रधाचरण गुप्त को मिलेगा वर्ष 2018 का मैथिलीशरण गुप्त पुरुस्कार

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कानपुर :- (विपिन कुमार) वरिष्ठ कवि रधाचरण गुप्त को मिलेगा वर्ष 2018 का मैथिलीशरण गुप्त पुरुस्कार- उनकी कृति ʼʼभारत में बुंदेली भाषा का व्याकरण एवं साहित्यिक अनुशीलनʼʼ के लिये उत्तरप्रदेश हिन्दी संसथान ने की घोषणा ।- वेदम वारिसी निसार सिमावी पुरुस्कार, पं0 बृज बिहारी दुबे पुरुस्कार सहित अन्य पुरस्कारों से भी नवाजे जा चुके है।औरैया। हिन्दी भाषा के मूर्धन्य कवि राधाचरण गुप्त ‘‘चरण’’ को उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ द्वारा उनकी गत वर्ष प्रकाशित पुस्तक ‘‘बुन्देली भाषा का व्याकरण एवं साहित्यिक अनुशील’’ के लिए मैथलीशरण गुप्त पुरूस्कार देने की घोषणा की गई है। इस घोषणा के बाद साहित्यजनों एवं प्रबुद्व वर्ग के लोगों ने चरण जी को बधाईयाॅ दी। ज्ञात हो कि वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि राधाचरण जी अब से पूर्व भी कई पुरूस्कारों से पुरूस्कृत किये जा चुके है, जिनमें हिन्दी सेवा निधि इटावा द्वारा बेदम वारिसी निसार सिमावी पुरूस्कार सहित हिन्दी प्रोत्साहन निधि, औरैया, अखिल भारतीय विकास परिषद, विधूना, पारथ परिषद, उरई, मैथलीशरण गुप्त जयन्ती समारोह समिति, लखनऊ, इन्द्रधनुष साहित्यिक संस्था, धामपुर बिजनौर, सहित अन्य कतिपय संस्थाओं ने उनको सम्मानित किया है। उनकी प्रसिद्व कृतियों में गीत संचरण, अराधन, पथरा, त्रिपगा, बेजुवाॅ जज्बात, धना धनाईयाॅ, याराना शामिल है। वर्ष 1936 में जनपद जालौन के कोंच में जन्में चरण जी अपने बाल्यावस्था में ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पं0 प्रभुदयाल द्विवेदी जी के सानिध्य में आ गये और साहित्य की ओर उनका झुकाव हो गया। आपने बाल्यावस्था से ही माॅ सरस्वती की सेवा अपने छन्दों से की। नौकरी में आने के बाद लेखन के लिए कम समय मिल पाने के कारण उनका लेखन सीमित रहा। सेवानिवृत्ति के बाद से वह अनवरत साहित्य साधना में लीन हो गये। प्रारम्भ से ही उनके साहित्य में आध्यात्मिक झुकाव नजर आता है। बाद में विभिन्न विधाओं में लिखने का श्रेय भी उनको है। उनका सर्वाधिक नवीन प्रयास त्रिपगा है, जो कि जापानी विधा हाईकू का हिन्दी रूपान्तरण है। आप 83 वर्ष की अवस्था में आज भी अपनी लेखनी से माॅ भारती की सेवा कर रहे है। उनकी इस उपलब्धि पर डा डीपी सिंह, कवि अजय शुक्ला अंजाम, अयाज अहमद अयाज, गुरू प्रसाद गुरू, मेजर आदित्य त्रिपाठी, डा राजेन्द्र शुक्ल, कवि डा गोविन्द द्विवेदी, ओम नारायण चतुर्वेदी मंजुल, रमेश शर्मा सहित अन्य लोगों ने उन्हें बधाई दी।

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