दूरसंचार कंपनी एयरटेल को होगा फायदा वोडाफोन और आईडिया की अपेक्षा

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दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल की बैलेंस शीट बाजार में उसकी पुरानी प्रतिस्पर्धी कंपनी वोडाफोन आइडिया की तुलना में बेहतर है। यदि इन दोनों कंपनियों की समीक्षा याचिकाएं उच्चतम न्यायालय में खारिज हो जाती हैं और उन्हें लाइसेंस शुल्क जैसे पुराने सांविधिक बकायों का पूरा भुगतान करना पड़ता है।

उस स्थिति में वोडाफोन आइडिया की कमजोरी का फायदा एयरटेल को हो सकता है। मॉर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट में यह कहा गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एयरटेल पर 4.8 अरब डॉलर तथा वोडाफोन आइडिया पार पांच अरब डॉलर का बकाया है। यदि उच्चतम न्यायालय दोनों कंपनियों की समीक्षा याचिकाएं खारिज कर देता है तो उन्हें पूरा बकाया भुगतान करना होगा।

दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल की बैलेंस शीट बाजार में उसकी पुरानी प्रतिस्पर्धी कंपनी वोडाफोन आइडिया की तुलना में बेहतर है। यदि इन दोनों कंपनियों की समीक्षा याचिकाएं उच्चतम न्यायालय में खारिज हो जाती हैं और उन्हें लाइसेंस शुल्क जैसे पुराने सांविधिक बकायों का पूरा भुगतान करना पड़ता है। उस स्थिति में वोडाफोन आइडिया की कमजोरी का फायदा एयरटेल को हो सकता है। मॉर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट में यह कहा गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एयरटेल पर 4.8 अरब डॉलर तथा वोडाफोन आइडिया पर पांच अरब डॉलर का बकाया है। यदि उच्चतम न्यायालय दोनों कंपनियों की समीक्षा याचिकाएं खारिज कर देता है तो उन्हें पूरा बकाया भुगतान करना होगा। यह एयरटेल के लिए भी नुकसादेह होगा लेकिन वोडाफोन आइडिया के लिए स्थिति अधिक गंभीर जाएगी क्योंकि 24 जनवरी 2020 से पहले इस भुगतान के लिए पैसे जुटाने में उन्हें मुश्किलें होंगी। यह दूरसंचार उद्योग में बाजार हिस्सेदारी पर असर डाल सकता है। उच्चतम न्यायालय ने 24 अक्तूबर के आदेश में कहा है कि कंपनियों को तीन माह मे बकाये का भुगतान करना होगा। कंपनियों को 1.47 लाख करोड़ रुपये का भुगतान करना है।

दूरसंचार कंपनी एयरटेल को होगा फायदा वोडाफोन और आईडिया की अपेक्षा पर यह एयरटेल के लिए भी नुकसादेह होगा लेकिन वोडाफोन आइडिया के लिए स्थिति अधिक गंभीर जाएगी क्योंकि 24 जनवरी 2020 से पहले इस भुगतान के लिए पैसे जुटाने में उन्हें मुश्किलें होंगी। यह दूरसंचार उद्योग में बाजार हिस्सेदारी पर असर डाल सकता है। उच्चतम न्यायालय ने 24 अक्तूबर के आदेश में कहा है कि कंपनियों को तीन माह मे बकाये का भुगतान करना होगा। कंपनियों को 1.47 लाख करोड़ रुपये का भुगतान करना है।

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