दुपट्टे का दीदार

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आर.के.रस्तोगी

(1) दुपट्टा अब तो आउट ऑफ फैशन हो गया । अब तो बेचारा ये फटकर, बेकार हो गया ।

(2) आ जाती थी कभी छत पर लाल दुपट्टा ओढकर । पता चल जाता था, मोहब्बत का इजहार हो गया

(3) समझते थे कभी इसे शर्म शर्म हया की निशानी । अब तो बेशर्मी का ये रूप, साकार हो गया ।।

(4) लहराते थे कभी दुपट्टे को इश्क के दर्शाने में । कैसे दिखाई दे ये अब तो, अंधकार हो गया ।।

(5) ओढती थी दुपट्टा बाहर निकलती थी लड़कियां । पता नहीं अब क्यों, ये तन से फरार हो गया ।।

(6) कंधे से जब यह सरकता, तो हाथ लपक लेता । अब तो यह सीन देखना भी दुश्वार हो गया ।।

(7) रस्तोगी ने फाड़ कर दुपट्टा घावो पर बांध लिया । बांधते ही घावों पर ये दुपट्टा, उसका दीदार हो गया ।। *आर.के.रस्तोगी *

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